नरक चतुर्दशी : क्यों मनाया जाता है यह पर्व, क्या है इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता

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रायपुर। दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का पर्व इस वर्ष 19 अक्टूबर 2025 को श्रद्धा और आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस दिन को ‘छोटी दिवाली’, ‘रूप चौदस’ और ‘काली चौदस’ के नाम से भी जाना जाता है।

यह पर्व केवल दीपदान का नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

🌅 क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था, जो 16,000 कन्याओं को बंदी बनाकर रखे हुए था। नरकासुर के अत्याचारों से पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल तीनों लोक त्रस्त थे।
भगवान श्रीकृष्ण ने जब उसका वध किया, तब सभी लोकों में खुशी और प्रकाश का माहौल फैल गया।
तब से यह दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाने लगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

🛁 तेल स्नान और दीपदान की परंपरा

इस दिन भोर से पहले तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इससे शरीर और आत्मा दोनों की शुद्धि होती है।
इसके बाद लोग दीपक जलाकर यमराज की पूजा करते हैं और अपने घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपदान करते हैं।
यह परंपरा अकाल मृत्यु से रक्षा और पापों के नाश के लिए की जाती है।

🌟 रूप चौदस का महत्व

कई जगह इस दिन को ‘रूप चौदस’ कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन उबटन और तेल स्नान करने से शरीर में तेज और रूप में निखार आता है।
इसी कारण महिलाएँ इस दिन सौंदर्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देती हैं।

🔱 आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

नरक चतुर्दशी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सामाजिक पर्व भी है।
यह हमें सिखाता है कि जैसे भगवान कृष्ण ने नरकासुर के अत्याचार का अंत किया, वैसे ही हमें भी अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मकता जैसे नरकासुरों को नष्ट करना चाहिए।
इस दिन दीपक जलाना अंधकार को मिटाने और ज्ञान के प्रकाश को फैलाने का प्रतीक माना गया है।

🪔 वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

भारतीय ऋषियों ने इस दिन तेल से स्नान करने का जो विधान बताया है, उसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है।
सर्दी के मौसम की शुरुआत में सरसों या तिल के तेल से मालिश और स्नान शरीर को संक्रमणों से बचाता है और त्वचा को नमी प्रदान करता है।
इसलिए यह पर्व स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी माना गया है।

🌼 संक्षेप में

नरक चतुर्दशी का पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि —

> “प्रकाश का अर्थ केवल दीये से नहीं, बल्कि हमारे भीतर के ज्ञान, प्रेम और करुणा के उजाले से है।”

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