डायलिसिस के दौरान आदिवासी युवती की मौत, स्टाफ पर मशीन बंद करने का गंभीर आरोप

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पिता कंधे पर उठाकर दौड़ा, लेकिन OT पहुंचने से पहले बुझ गई बेटी की सांस
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला गंभीर मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में इलाज के दौरान एक 19 वर्षीय आदिवासी युवती भगवती धुर्वे की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

डायलिसिस के दौरान बिगड़ी हालत

परिजनों के मुताबिक भगवती धुर्वे, निवासी ग्राम चरखुरा, डायलिसिस कराने जिला अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि इलाज के दौरान डायलिसिस मशीन को बीच में ही बंद कर दिया गया, जिसके बाद युवती को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी।

पिता कंधे पर उठाकर दौड़ा, नहीं बच सकी जान

बताया जा रहा है कि समय पर स्ट्रेचर या उचित व्यवस्था नहीं मिलने पर पिता अपनी बेटी को कंधे पर उठाकर ऑपरेशन थिएटर की ओर दौड़ा, लेकिन OT तक पहुंचने से पहले ही भगवती ने दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक दृश्य ने मौके पर मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया।

10 महीने से खराब पड़ी है डायलिसिस मशीन

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में कुल 6 मशीनें हैं, जिनमें से एक मशीन मार्च 2025 से खराब पड़ी है, यानी करीब 10 महीनों से। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से मशीन बंद होने के बावजूद उसे दुरुस्त कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अस्पताल में हंगामा, परिजनों का विरोध

घटना की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी, लापरवाही और आदिवासी मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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