छत्तीसगढ़ कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज, CM विष्णुदेव साय ने राज्यपाल से की मुलाकात

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज शाम अचानक राजभवन पहुंचे और राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के पीछे मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को उन विधायकों के नाम सौंप दिए हैं जिन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई जानी है।

दरअसल, सीएम विष्णुदेव साय ने आज सुबह ही मीडिया से चर्चा में कहा था कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और यह उनके विदेश दौरे (22 अगस्त से पहले) से पूर्व ही संभव है। भाजपा हाईकमान से विस्तार को मंजूरी मिल चुकी है और माना जा रहा है कि 18 अगस्त से पहले नए मंत्री शपथ ले सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि हरियाणा के फॉर्मूले की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी मंत्रिमंडल का आकार बढ़ाया जा सकता है। हरियाणा की तरह यहां भी मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

संभावित नामों की चर्चा

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है और कई नए नाम उभरकर सामने आए हैं।

🔹 गुरु खुशवंत सिंह (आरंग विधायक) – सतनामी समाज के प्रभावशाली गुरु बालदास के बेटे और उत्तराधिकारी। उन्हें मंत्री बनाने की सिफारिश इसलिए भी हो रही है ताकि भाजपा अनुसूचित जाति वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत कर सके। सूत्रों का कहना है कि गुरु बालदास दिल्ली तक जाकर अपने बेटे को मंत्री पद दिलाने की पैरवी कर चुके हैं।

🔹 राजेश अग्रवाल (अंबिकापुर विधायक) – उप मुख्यमंत्री रहे टीएस सिंहदेव को हराकर विधानसभा पहुंचे। सरगुजा संभाग में भाजपा को मजबूत करने के लिए उनके नाम पर जोर है। साथ ही वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व भी उनके माध्यम से संभव होगा।

🔹 गजेंद्र यादव (दुर्ग विधायक) – आरएसएस बैकग्राउंड और यादव समाज से जुड़े। ओबीसी वर्ग में यादव समाज की बड़ी जनसंख्या होने के चलते उनके मंत्री बनने की संभावना प्रबल है। सूत्रों का कहना है कि संघ भी उनके नाम पर दबाव बना रहा है।

राजनीतिक समीकरण

छत्तीसगढ़ बनने के बाद से परंपरागत रूप से 13 मंत्री बनते आए हैं, लेकिन नियमों के मुताबिक 90 विधायकों के आधार पर मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्रियों को जगह दी जा सकती है। यही वजह है कि तीन नए चेहरों के कैबिनेट में शामिल होने की पूरी संभावना है।

हालांकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। भाजपा संगठन के भीतर भी अलग-अलग नामों को लेकर मंथन जारी है।

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