
फुलझर राज के अति प्राचीन तोषगांव बलौद के समकालीन अस्तित्व में आया होगा। इस राज्य के अधिकांश कृषक कुरमी जाति के थे। यहां पूर्व में किसी कुरमी जाति के मालगुजार सामंत कृषक ने देव नदी सुरंगी के तट पर इस प्रमुख ग्राम की स्थापना की थी। जिसका नाम संभवतः तोषराम रहा होगा। कालांतर में यही तोषराम नाम तोषगांव के नाम से जाना गया। राजा मोगरा साय ने सम्पन्न एवं सुविधायुक्त ग्राम तोषगांव को अपनी राजधानी बनाया था। राजा मोंगरा साय ने अपने पुत्र हड़राज साय को अपना राज सौंपकर गढ़ फुलझर में अपना शेष जीवन बिताया। राजा हड़ाज साय एक शक्तिशाली शासक था और 18 वर्ष तक शासन किया। राजधानी तोषगांव प्रारम्भ से ही सम्पन्न ग्राम रहा है। खाडाबंद तालाब को संभवतः राजा हड़राज साय ने खुदवाया था, क्योंकि गोंड जाति सूर्यवंशीय राजपूत थे, जो विजया दशमी पर्व को धूमधाम से मनाते थे। विजया दशमी पर्व पर खाड़ा धोने की परम्परा यहां थी, जो आज भी है। राजा हड़राज ने अपने कार्यकाल में अनेक तालाब खुदवाए राजा ने अपनी वीरता से कई राज्य को जीता, लेकिन राजधानी में कोई परिवर्तन नहीं किया। उस काल में में यहां मिट्टी ढूंलाने के लिए गधे का उपयोग करते थे। राजा हड़राज के पुत्र बली साय ने भी 10 वर्ष तक इस राज्य में शासन किया।









