कौशल्या धाम में ज्ञान का महासंगम: स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी ने की 4 वेद, 6 शास्त्र और 18 पुराणों की स्थापना की घोषणा; जामगांव-आर राम मंदिर पोस्टर का विमोचन

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दुर्ग/रायपुर: छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आध्यात्मिक चेतना का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। दुर्ग के महेश कॉलोनी स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित ‘होली मिलन समारोह एवं प्रांतीय बैठक’ में परम पूज्य स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी ने कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। इस गरिमामय कार्यक्रम में महाराज जी के सानिध्य में जामगांव-आर (Jamgao-R) के भव्य राम मंदिर निर्माण और गौ-सेवा प्रकल्प के आमंत्रण पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी की ऐतिहासिक घोषणा: एक ही स्थान पर वेदों और पुराणों का संगम

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी ने बताया कि माता कौशल्या धाम में अब श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराणों के दर्शन और ज्ञान का लाभ मिलेगा। महाराज जी के अनुसार, द्वारका और काशी जैसे गिने-चुने पवित्र स्थानों के बाद अब छत्तीसगढ़ का कौशल्या धाम ऐसा दुर्लभ केंद्र बनेगा जहाँ सनातन धर्म के समस्त ज्ञान स्तंभ एक साथ स्थापित होंगे।

जामगांव-आर (Jamgao-R) राम मंदिर पोस्टर का विमोचन

​समारोह के दौरान स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी ने राम मंदिर जामगांव-आर के निर्माण एवं गौ-सेवा प्रकल्प के पोस्टर का विमोचन कर क्षेत्रवासियों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर जामगांव-आर और आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे। महाराज जी ने मंदिर निर्माण को लेकर क्षेत्रवासियों के उत्साह की सराहना की और इसे सनातन संस्कृति की मजबूती के लिए एक बड़ा कदम बताया।

महोत्सव की मुख्य रूपरेखा:

  • स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी के मार्गदर्शन में ‘कौशल्या कैलेंडर योजना’ के तहत माता कौशल्या के चित्र को 1 लाख घरों तक पहुँचाया जाएगा।
  • पुरुषोत्तम मास महोत्सव (17 मई – 15 जून): एक माह तक कौशल्या धाम में प्रतिदिन रुद्राभिषेक, हवन, रामायण और भागवत पारायण का भव्य आयोजन होगा।
  • सामाजिक समरसता सम्मेलन: उत्सव के दौरान  समाज के विभिन्न वर्गों के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन महाराज जी की उपस्थिति में संपन्न होंगे।
  • निशुल्क सेवा: महोत्सव के दौरान सभी श्रद्धालुओं के लिए ‘सीता रसोई’ के माध्यम से भोजन और आवास की निशुल्क व्यवस्था रहेगी।

​स्वामी रामबालक दास महात्यागी जी की इन घोषणाओं ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर एक नई ऊंचाई प्रदान की है।

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