
छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की घोषणा हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सूचना भी जारी कर दी है। कल 20 अगस्त को राजभवन में नये मंत्रिमंडल का शपथ ग्राहण होगा।

बीजीपी के सूचना पत्र में लिखा है… ‘सभी सदस्यों को सूचित किया जाात है कि दिनांक 20 अगस्त 2025 को प्रातः 10:30 बजे राजभवन रायपुर में मंत्रीमण्डल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित है। अतः सभी माननीय सदस्यों से आग्रह है शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहेंगे।’
विभागों के बंटवारे की बात करें तो सांसद चुने जाने के बाद जून 2024 में बृजमोहन अग्रवाल ने इस्तीफा दिया था, उसके बाद स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग को मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया था कि नए मंत्री बनने के बाद उन्हें सुपूर्द कर देंगे। मगर इसमें साल भर से ज्यादा समय निकल गया। बहरहाल, अब जब तीन नए मंत्री बन जाएंगे तो सबसे पहले मुख्यमंत्री अपने विभागों के वर्क लोड से हल्का होना चाहेंगे। वैसे भी शिक्षा विभाग किसी मुख्यमंत्री के पास नहीं होता। सबसे अधिक फाइलें इसी विभाग में आती हैं। बहरहाल, मंत्रियों को विभाग बांटना विशुद्ध तौर से मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का मामला है। इसे मुख्यमंत्री ही तय करते हैं। मगर सत्ता के गलियारों में मंत्रियों के संभावित विभागों को लेकर जो कैलकुलेशन चल रहा, अटकलबाजियां चल रहीं, उसके अनुसार तीनों मंत्रियों को मोटे तौर पर इस तरह मंत्रियां को विभाग मिल अनुमान हैं….
*गजेंद्र यादव को शिक्षा मंत्रालय*
सूत्रों से जानकारी मिली है कि दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव पढ़े-लिखे हैं। रविशंकर विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। सो, शिक्षा मंत्री उन्हें बनाया जा सकता है। विभागों के युक्तियुक्तकरण के तहत डिप्टी सीएम विजय शर्मा से विज्ञान और तकनीकी शिक्षा लेकर उसे गजेंद्र यादव को दिया जा सकता है। इससे शिक्षा से जुड़े तीनों विभाग गजेंद्र यादव के पास आ जाएंगे। इस समय विजय शर्मा के पास गृह, जेल, ग्रामीण विकास और पंचायत तथा तकनीकी शिक्षा विभाग है।
*खुशवंत साहेब को पीएचई*
अगर डिप्टी सीएम विजय शर्मा से तकनीकी शिक्षा लिया गया तो दूसरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव से पीएचई लेकर खुशवंत साहेब को दिया जा सकता है। खुशवंत के कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वंद्वी रुद्र गुरू के पास भी पीएचई रहा है। खुशवंत को इसके साथ खादी ग्रामोद्योग वगैरह विभाग भी मिल सकता है। बता दें, डिप्टी सीएम के पास इस समय पीडब्लूडी, नगरीय प्रशासन और पीएचई है। जिस तरह विजय शर्मा के पास भारी भरकम होम, जेल, पंचायत और तकनीकी शिक्षा है, वही हाल अरुण साव का है।
*राजेश अग्रवाल को वन और आबकारी*
अत्यधिक संभावना है कि मुख्यमंत्री अपने पास माईनिंग, जीएडी, जनसंपर्क अपने पास रखें और ट्रांसपोर्ट तथा आबकारी किसी और मंत्री को दे दें। क्योंकि, ये दोनों विभाग छबि की दृष्टि से मुख्यमंत्री के पास नहीं होते। प्रारंभ में नए मंत्री की प्रत्याशा में ये दोनों विभाग मुख्यमंत्री के पास थे। ट्रांसपोर्ट तो एकदम से नहीं कहा जा सकता कि राजेश अग्रवाल को मिलेगा मगर आबकारी जरूर मुख्यमंत्री किसी मंत्री को सौंपना चाहेंगे। इसके लिए राजेश का नाम सबसे उपर चल रहा है।
वन क्यों?
ऐसी चर्चाएं हैं कि मंत्री केदार कश्यप वन मंत्रालय रखने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, किसी बड़े प्लेटफार्म पर उन्होंने ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं। मगर उन्हें करीब से जानने वालों का कहना है कि वे वन से खुश नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो फिर वन राजेश अग्रवाल को मिल सकता है। हालांकि, तब और ज्यादा फेरबदल करना होगा। क्योंकि, अगर उन्होंने वन छोड़ा तो फिर उन्हें कोई दूसरा बड़ा विभाग देना होगा। केदार कश्यप छोटे मंत्री नहीं हैं, रमन सिंह सरकार में शुरू से अंत तक पूरे 15 साल मंत्री रहे।
*मंत्रियों के विभागों का युक्तियुक्तकरण*
दो से अधिक विभाग वालों में दोनों डिप्टी सीएम के अलावा मंत्री ओपी चौधरी भी हैं। ओपी के पास इस समय वित्त, जीएसटी, पंजीयन, प्लानिंग और आवास पर्यावरण विभाग है। पंजीयन को छोड़कर विन जीएसटी और आवास पर्यावरण अलग तरह के वि हैं, इसलिए सीएम इन्हें ओपी के पास ही रखना चाहेंगे। फिर डेढ़ साल में सबसे अधिक रिफार्म पंजीयन में हुए हैं, इसे इधर-उधर करने पर सुधार कार्य प्रभावित होगा।
*मंत्रियों के विभागों का युक्तियुक्तकरण*
दो से अधिक विभाग वालों में दोनों डिप्टी सीएम के अलावा मंत्री ओपी चौधरी भी हैं। ओपी के पास इस समय वित्त, जीएसटी, पंजीयन, प्लानिंग और आवास पर्यावरण विभाग है। पंजीयन को छोड़कर वित्त, जीएसटी और आवास पर्यावरण अलग तरह के विभाग हैं, इसलिए सीएम इन्हें ओपी के पास ही रखना चाहेंगे। फिर डेढ़ साल में सबसे अधिक रिफार्म पंजीयन में हुए हैं, इसे इधर-उधर करने पर सुधार कार्य प्रभावित होगा।
*कैबिनेट का पहला विस्तार*
ज्ञातव्य है, विष्णुदेव कैबिनेट का यह पहला विस्तार होगा। 10 दिसंबर 2023 को विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। दिसंबर 2025 में भी कैबिनेट विस्तार लगभग फायनल हो गया था, मगर ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया। इसी तरह मई 2025 में भी हुआ। अंतिम समय में शपथ ग्रहण को रोक दिया गया।
बता दें, मुख्यमंत्री के शपथ लेने के 21 दिसंबर 2023 को 11 मंत्रियों ने शपथ ली थी। 12 में से एक मंत्री का पद खाली रखा गया था। मगर जून 2024 में सांसद चुने जाने के बाद रायपुर के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मंत्रिमंडल में दो पद खाली हो गया। पिछले साल हरियाणा में 13 मंत्री बनें तो फिर छत्तीसगढ़ में भी 13 मंत्रियों की मांगे उठी। इसलिए, क्योंकि हरियाणा में भी 90 विधायक हैं और छत्तीसगढ़ में। इसी के बाद छत्तीसगढ़ में भी 13 मंत्री बनाए जाने पर उपर से हरी झंडी मिल गई।
मंत्रिमंडल विस्तार में देरी की वजह संभावित दावेदारों में सहमति न बनना रहा। मंत्री बनने वालों में जिन विधायकों की शुरू से दावेदारी रहीं, उनमें अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत, गजेंद्र यादव, संपत अग्रवाल का नाम शामिल था। खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल का नाम आखिरी टाईम में सामने आया। 16 अगस्त को मुख्यमंत्री राजभवन गए, उसके बाद ये दोनों नाम सोशल मीडिया में चलने लगे। हालांकि, कल गजेंद्र यादव, खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल ने सीएम हाउस में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने तीनों भावी मंत्रियों को शपथ ग्रहण की औपचारिक सूचना देते हुए उन्हें बधाई दी।
